बंदी उरावं नहीं रहे

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बिहार (एकीकृत) के पूर्व मंत्री बंदी उरांव का मंगलवार को निधन हो गया है। वे रांची के हेहल स्थित आवास में रहते थे। बंदी उरांव के निधन की खबर सुनकर उनके पैतृक गांव भरनो प्रखंड के डुडिया पंचायत के दतिया बसाईर टोली के ग्रामीणों में शोक की लहर है। इधर उनके निधन की खबर के बाद उनके पैतृक गांव के अधिकांश घरों का चूल्हा नहीं जला। दतिया बसाईर टोली के ग्रामीण बताते है कि बंदी उरांव शुरू से ही सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते थे। जन सेवा करने के इरादे से पुलिस की नौकरी छोड़ उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की।

उनकी आरंभिक शिक्षा जिला स्कूल रांची से हुई थी। बंदी बाबू का परिवार गुमला जिले का प्रमुख राजनीतिक घरानों में शामिल रहा है। जनजातीय नेता कार्तिक उरांव उनके समधि थे। वहीं बंदी के पुत्र डॉ. अरुण उरांव भी सक्रिय राजनीतिक हैं। वे पहले कांग्रेस के छत्तीसगढ़ प्रभारी थे, लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा में शामिल हो गए। वहीं उनकी पुत्र वधु गीताश्री उरांव पूर्व झारखंड की शिक्षा मंत्री रही हैं। बंदी बाबू सिसई विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक निर्वाचित हुए हैं। वे एकीकृत बिहार में योजना एवं विकास मंत्री के पद पर आसीन थे। 

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