Children survive after migration of parents from Jharkhand

‘अयंग’ के संग (जनजातीय भाषा कुड़ख में अयंक का मतलब होता है, मां) जी नहीं, यह किसी बच्चों का जेल या सरकारी बाल सुधार गृह नहीं.. यह झारखंड के सुदूर गांव का स्कूल है। इसकी साजसज्जा या संसाधन के अभाव पर मत जाइये। इस स्कूल को चलाने की सोच और संचालकों की मानवीय संवेदना गौर करने लायक है। जरा सुनिये यहां रह रहे बच्चों को, आप खुद समझ जाएंगे इनकी व्यथा..

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