Vinod Kumar Bhagat

  • भाषा और लिपि, मानव विकास के लिए अनमोल रत्न

    भाषा और लिपि, मानव विकास के लिए अनमोल रत्न

    भाषा और लिपि, मानव विकास के लिए अनमोल रत्न से भी ज्यादा कीमती है। लिपि, भाषा की प्राण होती है। समाज, मानव समूह का सुरक्षा कवक्ष होता है। इन तीन चीजों के बाद विकास की संभावनाओं पर तथा समाज के विकास की सफलता और विफलता पर चर्चा किया जा सकता है। ईसा से हजारों सालों

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  • भाषा, मानव विकास के लिए अनमोल रत्न   

    भाषा, मानव विकास के लिए अनमोल रत्न   

    ईशा से हजारों सालों पूर्व में भी मानव सभ्यता थी और र्इसा के बाद 2018 र्इ के बीत जाने के बाद भी मानव समुदाय और समाज का विकास के बीच एक अत्यन्त ही गम्भीर और ज्वलंत भय सा बना हुआ है। पूरी दुनियाँ विकास की बात से जुड़ी हुर्इ हैं। कर्इ देा विकसित हो गए

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