Praveen Oraon

  • आदिवासी जीवन-दर्शन और कुड़ुख़ भाषा की तोलोंग लिपि

    आदिवासी जीवन-दर्शन और कुड़ुख़ भाषा की तोलोंग लिपि

    झारखण्ड अलग प्रांत आन्दोलन के दौरान हम छात्र नेताओं के जेहन में हमेाा ही एक प्रन उठता था – क्या, नये राज्य में हम अपनी भाशा-संस्कृति को सुरक्षित रख पाएंगे ? इसके लिए क्या-क्या कदम उठाने होंगे ? इसी क्रम में विचार आया – संस्कृति को बचाने के लिए भाशा़ को बचाना जरूरी है और

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