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कुंड़ुख़ मोबाईल एप्पस का निर्माण एवं लोकार्पण

कहा जाता है वर्तमान भूमण्डलीकरण के दौर में विकसित भाषा–संस्कृति के सामने विकासशील भाषा–संस्कृति को चौतरफा संघर्ष करना पड़ता है। ऐसी परिस्थिति में यदि विकासशील भाषा–संस्कृति को बचाये रखने तथा अगली पीढ़ी तक पंहूचाने के लिए सामयिक व्यवहारिक तकनीक का उपयोग करना चाहिए। उन तकनीक में से आज के दौर में वैसा तकनीक जो हरेक
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Kurukh Language become 8th official language in the West Bengal

It was the initiative of the Honorable CM of West Bengal, Mamata Banerjee that Kurukh language was declared on 21st February 2017 on the occasion of International Mother Tongue Day as one of the official language of West Bengal. On 8th February 2018, the Kurukh Language Bill was passed as the 8th official language in
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कुंड़ुख़ भाषा की तोलोंग सिकि के संस्थापक डॉ. नारायण उरांव को विभागीय एवं सामाजिक सम्मान

भारत सरकार के Linguistic Survey of India (लिंग्विस्टिक सर्वे ऑफ इंडिया) विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार कुंड़ुख़ एक उतरी द्रविड़ भाषा समूह की भाषा है। इस भाषा को बोलने वाले उरांव आदिवासी एवं अन्य समूह के लोग अपने देश भारत में लगभग 50 लाख हैं। पिछले दो दशक पूर्व तक इस भाषा की कोई
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जातीय जनगणना व राज्य की स्थानीय नीति पर सरकार की उपेक्षा को लेकर संगठनों की चिंता

झारखंड नामधारी संगठनों ने बुधवार को एक विशेष बैठक में जातीय जनगणना व राज्य की स्थानीय नीति पर चिंता जाहिर करते हुए सरकार से अविलंब क्रियांवयन की मांग की है। झारखंड आदिवासी संयुक्त मोर्चा एवं आदिवासी छात्र संघ केन्द्रीय समिति की पहल पर विभिन्न आदिवासी एवं मूलवासी समाजिक संगठनों का संयुक्त स्वरूप में विशेष बैठक
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श्रद्धांजलि : अद्दी कुँड़ख़ चाःला धुमकुडि़या पड़हा अखड़ा के कर्मठ कार्यकर्ता प्रकाश पन्ना पंकज नहीं रहे

रांची : सेवा निवृत यूनियन बैंक अधिकारी तथा अद्दी कुँड़ख़ चाःला धुमकुडि़या पड़हा अखड़ा‚ रांची के कर्मठ कार्यकर्ता का लम्बी बिमारी के बाद 30 जुलाई 2021 को दोपहर 1.30 बजे पल्स हॉस्पिटल‚ रांची में निधन हो गया। वे अपने पीछे पत्नी‚ दो बेटे एवं दो बेटियाँ छोड़ गये। वे ग्राम – लोंगा‚ पो0 – सातो‚
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कुंड़ुख़ भाषा एवं तोलोंग सिकि लिपि के प्रचार-प्रसार के लिए गांव-गांव में बोर्ड लगेंगे

सिसई/रांची: मंगलवार, दिनांक 29॰06॰2021 दिन मंगलवार को धुमकुड़िया धाम‚ सैन्दा सिसई गुमला के प्रांगन में कुंड़ुख धुमकुड़िया पड़हा समिति की बैठक गजेन्द्र उरांव की अध्यक्षता में दोपहर 12 बजे सम्पन्न हुई। इस बैठक में मटकु उरांव‚ परसु उरांव‚ बन्दे उरांव‚ जम्बुवा उरांव‚ चमरा उरांव‚ बिरेन्द्र उरांव‚ जुब्बी उरांव‚ धनेश्वर उरांव‚ पुन्ना उरांव‚ उमेश उरांव‚ विनोद
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संथाल विद्रोह के हूल दिवस पर सेंगेल अभियान का संकल्प

आज 30 जून- हूल महा या अंग्रेजों के खिलाफ हुई संताल बिद्रोह का ऐतिहासिक दिवस है। जब सिदो मुर्मू के नेतृत्व में 4 भाइयों (सिदो, कान्हू, चांद, भैरो) और दो बहनों (फूलो और झानो) ने भोगनाडी गांव, साहेबगंज ज़िला में 10 हज़ार संताल सिपाहियों के साथ 30 जून 1855 को क्रांति का बिगुल फूंका था।
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आदिवासी भाषा संस्कृति में योगदान के लिये हमेशा याद की जाएंगी सीता टोप्पो

85 वर्षीय आदरणीय श्रीमती सीता टोप्पो अब इस दुनियां में नहीं रहीं। वे दिनांक 15.05.2021 को 8:30 बजे सुबह अंतिम सांस लीं। वे एक कुशल गृहणी एवं समाज सेवी थीं। उनके पति स्व 0 राजू उराँव रॉ में एरिया आफिसर थे। उनकी 5 बेटियां तथा 1 बेटा हैं। वे 15 नाती-पोती की नानी-दादी बनीं। उनका
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यूजिन मिंज नहीं रहे, विनम्र श्रद्धांजलि!..

जैक (झारखंड अधिविद्य परिषद) के उप सचिव यूजिन मिंज का निधन हो गया है। उन्होंने 07 मई 2021 को अंतिम सांसें ली। उनके निधन से कुड़ुख़ भाषी समाज अत्यंत मर्माहत है। कुड़ुंख भाषा की तोलोंग सिकि एवं कुड़ुख़ भाषा के सिलेबस को स्कूल स्तर तक पहुंचाने में उनका बहुत बड़ा योगदान रहा है। अद्दी कुड़ुंख़
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डॉ निर्मल मिंज नहीं रहे!.. एवं अन्य खबर..

अलग झारखंड राज्य आंदोलन को बौद्धिक मोर्चे पर दिशा देनेवाले डॉ निर्मल मिंज नहीं रहे। अलग राज्य आंदोलन में उनका योगदान भुलाया नहीं जा सकता है। डॉ मिंज गोस्सनर चर्च के बिशप रहे हैं। डॉ निर्मल मिंज को साहित्य अकादमी का भाषा सम्मान से नवाजा जा चुका है। कुड़ुख भाषा में लेखन और उसके लिए
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- ओर- करम करम करले बहीन..आईज तारीख 08 मार्च 2026 दिन एतवार के कुड़ुख़ टाइम्स डॉट कॉम कर पुनह परकाशन कर बेरा में टी आर एल ब्लॉग ले उरांव अखरा से तीन गो गावल गीत के नागपुरी भखा में बताल हय। इके धेयान देवब और गुनगुनाब अपने मन सउब – 1 ओर छोट-मोटे तेतईर गे आयो,भिंजल छांहईर गे आयो ।2।घुराल… Read more: ओर- करम करम करले बहीन..
- झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?राँची के कोर्नेलियस मिंज को लोग करन कहते हैं. उनका परिवार सरना आदिवासी था लेकिन बाद में ईसाई बन गया. हालाँकि कोर्नेलियस के घर में अब भी कई लोग सरना हैं. यह परिवार साथ में सरहुल भी मनाता है और क्रिसमस भी. आपस में शादियाँ भी होती हैं. करन कहते हैं कि जब सरना और… Read more: झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?
- झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्मानितरांची: आज दिनांक 21.02.2026 दिन शनिवार को प्रेस क्लब रांची में अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर अखिल झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार सम्मान 2026 झारखंड के 9 साहित्यकारों के रचनाकारों के साथ ओल चिकि लिपि के रचयिता श्रद्धेय पं रघुनाथ मुर्मू तथा वरांग चिति के रचयिता श्रद्धेय कोल लाको बोदरा को मरणोपरांत उनके वंशजों को… Read more: झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्मानित
- औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?आजादी के पचहत्तर साल बाद भी भारत अंग्रेज और अंग्रेजियत (औपनिवेशिक गुलामी) से मुक्त नहीं हुआ है”—इस उक्ति को यदि गहराई से समझें, तो यह किसी भौतिक गुलामी की नहीं बल्कि मानसिक, सांस्कृतिक, प्रशासनिक और वैचारिक गुलामी की ओर संकेत करती है। भारत ने 1947 में राजनीतिक स्वतंत्रता तो प्राप्त की, परंतु औपनिवेशिक सत्ता द्वारा… Read more: औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?
- हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते यह जानकर बहुत प्रेरणा मिलती है कि गुमला, रांची, लातेहार और लोहरदगा के युवा गणित (Maths) जैसे कठिन विषय को भी कुँड़ुख में ढाल रहे हैं। प्रसिद्ध अफ्रीकी लेखक चिंतक न्गुगी वा थ्योंगो ने हमेशा यही कहा कि – “भाषा केवल साहित्य के लिए नहीं, बल्कि विज्ञान और तर्क के लिए भी होनी चाहिए” ।… Read more: हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते