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कोकराझार, असम में तोलोंग सिकि (कुँड़ुख़ भाषा की लिपि) कार्यशाला सम्पन्न

दिनांक 30 सितम्बर 2022 से 02 अक्टुबर 2022 तक कुँड़ुख़ लिटरेरी सोसायटी आफ इंडिया, नई दिल्ली का तीन दिवसीय राष्ट्रीय कुँड़ुख़ भाषा साहित्स सम्मेलन कोकराझार, असम में सम्पन्न हुआ. यह सम्मेलन कुँड़ुख़ (उरांव) साहित्य सभा, असम एवं आल कुँड़ुख़ (उरांव) छात्र संघ, असम के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किया गया था. इस कुँड़ुख़ भाषा सम्मेलन
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मंजु उरांव के खिलाफ समाज का तुगलकी फरमान स्वीकार्य नहीं, विरोध होगा : सेंगेल

आदिवासी महिला मंजू उरांव (गुमला जिला) को ट्रैक्टर से खेती करने के एवज में गांव वालों ने अंधविश्वास के आधार पर उनको ट्रैक्टर चलाने से मना किया, जुर्माना लगाया और बात नहीं मानने पर सामाजिक बहिष्कार करने का एकतरफा तुगलकी फरमान जारी किया है। जो संविधान कानून के खिलाफ है। स्त्री पुरुष की बराबरी के
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टाटा स्टील फाउण्डेशन के तकनीकी सहयोग से भाषा-लिपि शिक्षण आरंभ होगा

दिनांक 22.07.2022 दिन बुधवार को ऐतिहासिक पड़हा जतरा खुटा शक्तिस्थल, मुड़मा (राँची) झारखण्ड के परिसर में समाजसेवी माननीय श्री बंधन तिग्गा जी की अध्यक्षता में एक बैठक हुई। इस बैठक में टाटा स्टील फाउण्डेशन जमशेदपुर के अधिकारी एवं अद्दी कुँड़ुख़ चाःला धुमकुड़िया पड़हा अखड़ा (अद्दी अखड़ा) झारखण्ड, राँची नामक संस्था के पदधारी उपस्थित थे। इस
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देश को मिला पहला महिला आदिवासी राष्ट्रपति / द्रौपदी की जीत पर..

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति चुनाव में जीत दर्ज कर भारतीय राजनीति के इतिहास में पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति के तौर पर अपना नाम दर्ज करवा लिया है। मुर्मू की जीत पर देश के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में उत्साह और आशाओं की लहर व्याप गई
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औसत से कम वर्षा होने का पूर्वानुमान का प्रथम भाग सही साबित हुआ

दिनांक 21.06.2022 दिन मंगलवार को उरागन डिप्पा, ग्राम: सैन्दा, थाना: सिसई, जिला: गुमला (झारखण्ड) में पारम्परिक ग्रामीण मौसम पूर्वानुमान कर्ता द्वारा वर्ष 2022 का मौसम पूर्वानुमान किया गया। पारम्परिक मौसम पूर्वानुमान कर्ता श्री गजेन्द्र उराँव, 65 वर्ष, ग्राम: सैन्दा, सिसई (गुमला) तथा श्री बुधराम उराँव, 66 वर्ष, ग्राम: सियांग, सिसई (गुमला) द्वारा अपने पारम्परिक ज्ञान
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‘बेटी को पिता की जमीन में हिस्सेदारी के हाईकोर्ट के फैसले से आदिवासियों की बिसु सेन्दरा आहत है’

आदिवासियों बेटियों की पिता की जमीन में हिस्सेदारी के पक्ष में हाईकोर्ट के फैसले आदिवासी समाज का एक तबका खुद को आहत बता रहा है। 22 मई को भरनो थाना क्षेत्र में 22 पड़हा पारंपरिक बिसु सेन्दरा द्वारा आयोजित वार्षिक बैठक में यह चिंता का विषय बना रहा। संगठन द्वारा एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके
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अद्दी कुंड़ुख़ चाःला धुमकुड़िया पड़हा अखड़ा (अद्दी अखड़ा) संस्था अब नये कार्यालय में

दिनांक 05.04.2022 दिन मंगलवार को अद्दी कुंड़ुख़ चाःला धुमकुड़िया पड़हा अखड़ा (अद्दी अखड़ा), झारखण्डं, संस्था का कार्यालय, नये पते पर स्थानांतरण करने की प्रक्रिया पूरी की गई। अब अद्दी अखड़ा का नया कार्यालय पता – तोलोंग मचा, बोड़ेया रोड, नगड़ा डिप्पा, चिरौन्दी, थाना : बरियातु, जिला : रांची (झारखण्ड) है। नये कार्यालय के उद्घाटन के
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कुंड़ुख भाषा तोलोंग सिकि ‘लिपि’ शिक्षण केन्द्र, चक्रधरपुर का निरीक्षण

दिनांक 03-02-2022 को दिन वृहस्पतिवार को टाटा स्टील फाउन्डेशन, जमशेदपुर द्वारा संचालित कुंड़ुख भाषा तोलोंग सिकि ‘लिपि’ शिक्षण केन्द्र, चक्रधरपुर का निरिक्षण किया गया। यह कुंड़ुख भाषा लिपि शिक्षण केन्द्र, टाटा स्टील फाउन्डेशन, जमशेदपुर की ओर से उरांव सरना समिति, चक्रधरपुर के देखरेख में चलाया जाता है। इस अवसर पर टी सी एफ के पदाधिकारी
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हाई स्कूलों में 03 भाषा शिक्षक बहाली के विरोध में उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा गया

दिनांक 28.01.2022 दिन शुक्रवार को हाई स्कूलों में 03 भाषा शिक्षक बहाली के विरोध में उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा गया। कोरोना महामारी के आवश्यक नियमों का पालन करते हुए, उपायुक्त, गुमला का ज्ञापन, पड़हा धुमकुड़िया एजेरना पिण्डा, सिसई, गुमला द्वारा प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, सिसई के हाथों सौंपा गया। ज्ञापन में निम्नांकित बातें रखी गई –
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हाई स्कूलों में तीन भाषा शिक्षक बहाली नीति का विरोध आरंभ

दिनांक 23-01-2022 को स्थानीय अखबार में छपी खबर है कि झारखण्ड सरकार द्वारा उत्क्रमित उच्च विद्यालय में 2079 शिक्षकों की बहाली की जा रही है। इन विद्यालयों में भाषा विषय के कुल 567 पद हैं। इनमें से प्रत्येक विद्यालय में भाषा विषय के 03 शिक्षक होंगे। पूर्व में प्रत्येक उच्च विद्यालय में भाषा विषय के
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- ओर- करम करम करले बहीन..आईज तारीख 08 मार्च 2026 दिन एतवार के कुड़ुख़ टाइम्स डॉट कॉम कर पुनह परकाशन कर बेरा में टी आर एल ब्लॉग ले उरांव अखरा से तीन गो गावल गीत के नागपुरी भखा में बताल हय। इके धेयान देवब और गुनगुनाब अपने मन सउब – 1 ओर छोट-मोटे तेतईर गे आयो,भिंजल छांहईर गे आयो ।2।घुराल… Read more: ओर- करम करम करले बहीन..
- झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?राँची के कोर्नेलियस मिंज को लोग करन कहते हैं. उनका परिवार सरना आदिवासी था लेकिन बाद में ईसाई बन गया. हालाँकि कोर्नेलियस के घर में अब भी कई लोग सरना हैं. यह परिवार साथ में सरहुल भी मनाता है और क्रिसमस भी. आपस में शादियाँ भी होती हैं. करन कहते हैं कि जब सरना और… Read more: झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?
- झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्मानितरांची: आज दिनांक 21.02.2026 दिन शनिवार को प्रेस क्लब रांची में अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर अखिल झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार सम्मान 2026 झारखंड के 9 साहित्यकारों के रचनाकारों के साथ ओल चिकि लिपि के रचयिता श्रद्धेय पं रघुनाथ मुर्मू तथा वरांग चिति के रचयिता श्रद्धेय कोल लाको बोदरा को मरणोपरांत उनके वंशजों को… Read more: झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्मानित
- औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?आजादी के पचहत्तर साल बाद भी भारत अंग्रेज और अंग्रेजियत (औपनिवेशिक गुलामी) से मुक्त नहीं हुआ है”—इस उक्ति को यदि गहराई से समझें, तो यह किसी भौतिक गुलामी की नहीं बल्कि मानसिक, सांस्कृतिक, प्रशासनिक और वैचारिक गुलामी की ओर संकेत करती है। भारत ने 1947 में राजनीतिक स्वतंत्रता तो प्राप्त की, परंतु औपनिवेशिक सत्ता द्वारा… Read more: औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?
- हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते यह जानकर बहुत प्रेरणा मिलती है कि गुमला, रांची, लातेहार और लोहरदगा के युवा गणित (Maths) जैसे कठिन विषय को भी कुँड़ुख में ढाल रहे हैं। प्रसिद्ध अफ्रीकी लेखक चिंतक न्गुगी वा थ्योंगो ने हमेशा यही कहा कि – “भाषा केवल साहित्य के लिए नहीं, बल्कि विज्ञान और तर्क के लिए भी होनी चाहिए” ।… Read more: हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते