Current Affairs
Latest News & Events Update
-
मांडर में विलेज कोर्ट खोलने की तैयारी पूरी,19 पंचायत के लोगों को न्याय के लिए शहर के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी

रांची : झारखण्ड में ग्रामीणों को न्याय के लिए शहर के चक्कर लगाने से राहत मिलने वाली है. इसके लिए राज्य के गांवों में अदालतों की स्थापना की जा रही है. राजधानी राँची के गांव मांड़र में विलेज कोर्ट खोलने की पूरी तैयारी हो गई है.इसका उद्घाटन झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश करेंगे. गांव अदालत
-
जनजातीय शिक्षक पद सृजन को लेकर कुड़खर प्रतिनिधियों ने लोहरदगा सांसद और मांडर विधायक को ज्ञापन सौंपा

दिनांक 10 जुलाई 2024 को मांडर विधायक शिल्पी नेहा तिर्की से मिलकर कुड़ख़र समाज के प्रतिनिधियों ने कुँडुख शिक्षक पद सृजन विषय को लेकर ज्ञापन सौंपा। विधायक शिल्पी नेहा तिर्की ने प्रतिनिधियों से कहा की कुँड़ुख बहुल क्षेत्र में कुँड़ुख भाषा का ही शिक्षक होना चाहिए और उन्हें पूरा विश्वास है कि उरांव समाज की
-
गुमला विधायक एवं डी.सी को कुँड़ख़ भाषा का संरक्षण को लेकर कुँडुख़र प्रतिनिधियों ने ज्ञापन सौंपा

कुँडुख़ (उराँव) भाषा शिक्षक पद सृजन के स्थान पर गलत तरीके से नागपुरी शिक्षक का पद सृजित किया गया है। जिसे निरस्त कर पुन: सर्वेक्षण कराने की मांग को लेकर दिनांक 09/07/2024 को गुमला विधायक एवं डी.सी. को ज्ञापन सौंपा गया। साथ ही कक्षा प्रथम से एम.ए. तक कुँडुख़ भाषा विषय की पढ़ाई- लिखाई तोलोंग
-
कुँडुख़ (उराँव) भाषा शिक्षक पद सृजन में भारी गड़बडी, सर्वे निरस्त कर पुन: सर्वे कराने की मांग

झारखंड सरकार की ओर से पहली बार आदिवासी/ जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा शिक्षक बहाल करने जा रही है। सरकार चाहती है कि आदिवासी भाषाओं का विकास, संरक्षण एवं संवर्धन हो। पिछले दिन आदिवासी भाषा शिक्षक पद सृजन करने के लिए सर्वे किया गया। जिसमें सर्वे नीति सही नहीं होने के कारण प्राथमिक/ मध्य विद्यालय के
-
कुँडुख़ (उराँव) भाषा शिक्षक पद सृजन-सर्वे में भारी गड़बड़ी, सुधार नहीं हुआ तो कुँडुख़ समाज आंदोलन करने के लिए हो जाएगा बाध्य

आदिवासियों की विलुप्त होती कुँडुख़, मुण्डा, हो, खड़िया आदि भाषा को बचाने के लिए सरकार ने प्राथमिक/ मध्य विद्यालय स्तर पर भाषा शिक्षक बहाली कराने का निर्णय लिया है। यह निर्णय सराहनीय है। लेकिन वहीं पांचवी अनुसूचित क्षेत्र के गुमला जिला के भरनो प्रखंड को छोड़कर, गुमला जिला के शेष सभी प्रखंडो में कुँडुख़ (
-
विश्वविद्यालय कुँडु़ख विभाग को तोलोंग सिकि लिपि पर पठन-पाठन करने हेतु ज्ञापन सौंपा गया

आज दिनांक 02/07/2024 को अद्दी कुँड़ुख चाला धुमकुड़िया पड़हा अखड़ा, रांची संस्था के द्वारा कुँड़ुख विभाग, रांची विश्वविद्यालय (जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा संकाय ) के विभाग अध्यक्ष डॉ नारायण भगत महोदय को ज्ञापन सौंपा गया। जिसमें कुँड़ुख भाषा की लिपि तोलोंग सिकी में पठन-पाठन आरंभ करने तथा विषयवार परीक्षा होने की बात रखी गई। उरांव/कुँड़ुख
-
उरांव समाज प्रतिनिधि मंडल ने तोलोंग सिकि लिपि को विवि में लागू कराने हेतु राज्यपाल के समक्ष रखी मांग

दिनांक 26.06.2024 दिन बुधवार को 03.00 बजे अपराहन 05 उरांव आदिवासी,अपनी मातुभाषा कुंड़ुख एवं कुंड़ुख़ की लिपि तोलोंग सिकि के संरक्षण तथा संवर्द्धन के लिए महामहीम राज्यपाल,झारखण्ड से मिले । प्रतिनिधि मण्डल का नेतृत्व सुश्री नीतू साक्षी टोप्पो , पेल्लो कोटवार, अद़दी अखड़ा, रांची द्वारा किया गया। इस प्रतिनिधि मण्डल में साहित्यकार सह साहित्य अकादमी,
-
धुमकुड़िया का उद्घाटन : दिनांक 16/06/2024 : स्थान :- आताकोरा लेटंगा टोली, भरनो

भरनो :-आताकोरा लेटंगा टोली के युवाओं ने विलुप्त होती कुंडुख़ भाषा संस्कृति की संरक्षण एवं संवर्धन करने के उद्देश्य से श्रम दान कर एक धुमकुड़िया का नव निर्माण किया है । धुमकुड़िया नव निर्मित करने के बाद में एक विशेष नेग ,पूजा-अनुष्ठान- डण्डा कट्टना किया जाता है । दिनांक 16/06/2024 को आताकोरा लेटंगा टोली के
-
झारखंड में घुसपैठियों के आतंक पर परिचर्चा संपन्न आदिवासियों की जमीन और बेटियों की आबरू लूट का मसला

रांची: झारखंड के आदिवासी इलाकों में घुसपैठियों का आतंक बढ़ता जा रहा है। घुसपैठिये आदिवासियों की जमीन ही नहीं लूट रहे आदिवासी बेटियों की आबरू से लेकर उनकी तस्करी तक कर रहे हैं। इसी प्रसंग में विगत रविवार यानी 24 मार्च 2024 को शाम साढ़े सात से साढ़े नौ बजे तक एक परिचर्चा का आयोजन
-
रांची विश्वविद्यालय पाठ्यक्रम में कुंड़ुंख भाषा व तोलोंग सिकि को शामिल करने पर सहमति नहीं बनी

रांची: कुंड़ख भाषा एवं इसकी लिपि ‘तोलोंग सिकि’ को विश्वविद्यालय स्तर के पाठ्यक्रम में शामिल किये जाने को लेकर उद्वेलित कुंड़ुख भाषा-भाषी समाज के एक प्रतिनिधिमंडल ने पिछले दिनों रांची विश्वविद्यालय के कुलपति से भेंट की। कुलपति ने विषय को गंभीरता से लेते हुए एक मार्च 2024 का दिन तय किया और प्रतिनिधिंडल को बताया
Latest Posts
- ओर- करम करम करले बहीन..आईज तारीख 08 मार्च 2026 दिन एतवार के कुड़ुख़ टाइम्स डॉट कॉम कर पुनह परकाशन कर बेरा में टी आर एल ब्लॉग ले उरांव अखरा से तीन गो गावल गीत के नागपुरी भखा में बताल हय। इके धेयान देवब और गुनगुनाब अपने मन सउब – 1 ओर छोट-मोटे तेतईर गे आयो,भिंजल छांहईर गे आयो ।2।घुराल… Read more: ओर- करम करम करले बहीन..
- झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?राँची के कोर्नेलियस मिंज को लोग करन कहते हैं. उनका परिवार सरना आदिवासी था लेकिन बाद में ईसाई बन गया. हालाँकि कोर्नेलियस के घर में अब भी कई लोग सरना हैं. यह परिवार साथ में सरहुल भी मनाता है और क्रिसमस भी. आपस में शादियाँ भी होती हैं. करन कहते हैं कि जब सरना और… Read more: झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?
- झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्मानितरांची: आज दिनांक 21.02.2026 दिन शनिवार को प्रेस क्लब रांची में अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर अखिल झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार सम्मान 2026 झारखंड के 9 साहित्यकारों के रचनाकारों के साथ ओल चिकि लिपि के रचयिता श्रद्धेय पं रघुनाथ मुर्मू तथा वरांग चिति के रचयिता श्रद्धेय कोल लाको बोदरा को मरणोपरांत उनके वंशजों को… Read more: झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्मानित
- औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?आजादी के पचहत्तर साल बाद भी भारत अंग्रेज और अंग्रेजियत (औपनिवेशिक गुलामी) से मुक्त नहीं हुआ है”—इस उक्ति को यदि गहराई से समझें, तो यह किसी भौतिक गुलामी की नहीं बल्कि मानसिक, सांस्कृतिक, प्रशासनिक और वैचारिक गुलामी की ओर संकेत करती है। भारत ने 1947 में राजनीतिक स्वतंत्रता तो प्राप्त की, परंतु औपनिवेशिक सत्ता द्वारा… Read more: औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?
- हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते यह जानकर बहुत प्रेरणा मिलती है कि गुमला, रांची, लातेहार और लोहरदगा के युवा गणित (Maths) जैसे कठिन विषय को भी कुँड़ुख में ढाल रहे हैं। प्रसिद्ध अफ्रीकी लेखक चिंतक न्गुगी वा थ्योंगो ने हमेशा यही कहा कि – “भाषा केवल साहित्य के लिए नहीं, बल्कि विज्ञान और तर्क के लिए भी होनी चाहिए” ।… Read more: हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते