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कुँड़ुख भाषा तोलोंग सिकि के विकास की कहानी – डॉ निर्मल मिंज

साहित्य अकादमी सम्मान (कुँड़ुख भाषा) से सम्मानित डॉ निर्मल मिंज का कुँड़ुख भाषा एवं तोलोंग सिकि के विकास पर वर्ष 2019 में वक्तब्य : कुँड़ुख भाषा तोलोंग सिकि के विकास की कहानी kuEzux lipi qoloX siki gahi xi:ri kuEzux kaqQA gahi xi:ri gA wiGam raHi. barA nA:m gunain nanoq. kaqQA kaCnaKarnA arA awin e:rA ge si:bA xA:rnA gahi
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कुँड़ुख़ व तोलोंग सिकि पर क्या कहा था डॉ मुन्डा व डॉ मिंज ने

यह आलेख पद्मश्री डॉ रामदयाल मुण्डा एवं साहित्य अकादमी सम्मान (कुँड़ुख़ भाषा) से सम्मानित डॉ निर्मल मिंज का कुँड़ुख़ भाषा एवं तोलोंग सिकि के विकास में उनके योगदान एवं उनके विचार को केंद्रित करके लिखा गया है। डॉ मुण्डा ने कहा था- ‘हमारे देश के आदिवासियों द्वारा बोली जाने वाली भाषाओं के लिए एक सामान्य
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आदिवासी भाषा संस्कृति में योगदान के लिये हमेशा याद की जाएंगी सीता टोप्पो

85 वर्षीय आदरणीय श्रीमती सीता टोप्पो अब इस दुनियां में नहीं रहीं। वे दिनांक 15.05.2021 को 8:30 बजे सुबह अंतिम सांस लीं। वे एक कुशल गृहणी एवं समाज सेवी थीं। उनके पति स्व 0 राजू उराँव रॉ में एरिया आफिसर थे। उनकी 5 बेटियां तथा 1 बेटा हैं। वे 15 नाती-पोती की नानी-दादी बनीं। उनका
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गलती सुधारने का वक्त आ गया है: डॉ निर्मल मिंज (संदर्भ: झारखंड)

यह वीडियो स्वर्गीय डॉ निर्मल मिंज को श्रद्धांजलि है। डॉ मिंज का यह वीडियो 19 मई 2017 को रिकॉर्ड किया गया था। साक्षात्कारकर्ता हैं पत्रकार किसलय।
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डॉ निर्मल मिंज नहीं रहे!.. एवं अन्य खबर..

अलग झारखंड राज्य आंदोलन को बौद्धिक मोर्चे पर दिशा देनेवाले डॉ निर्मल मिंज नहीं रहे। अलग राज्य आंदोलन में उनका योगदान भुलाया नहीं जा सकता है। डॉ मिंज गोस्सनर चर्च के बिशप रहे हैं। डॉ निर्मल मिंज को साहित्य अकादमी का भाषा सम्मान से नवाजा जा चुका है। कुड़ुख भाषा में लेखन और उसके लिए
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डॉ गिरिधारी राम गौँझू नहीं रहे.. !

समाचार दु:खद है.. झारखंड की संस्कृति, भाषा व सामाजिक उत्थान के लिये हमेशा संघर्षरत प्रणेता डॉ गिरिधारी राम गोंझू का असमय निधन हो गया है। उन्होंने आज गुरूवार 15 अप्रैल 2021 को रांची स्थित रिम्स अस्पताल में अंतिम सांस लीं। उन्हें हर्ट अटैक आया था। डॉ गिरिधारी राम गौंझू रांची विश्वविद्यालय के जनजातीय एवं क्षेत्रीय
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बंदी उरावं नहीं रहे

बिहार (एकीकृत) के पूर्व मंत्री बंदी उरांव का मंगलवार को निधन हो गया है। वे रांची के हेहल स्थित आवास में रहते थे। बंदी उरांव के निधन की खबर सुनकर उनके पैतृक गांव भरनो प्रखंड के डुडिया पंचायत के दतिया बसाईर टोली के ग्रामीणों में शोक की लहर है। इधर उनके निधन की खबर के
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कुँड़ुख पेंटिंग को नवजीवन देती – कलाकार सुमन्ती उराँव

यूँ कलाकार और कला की कोई सीमा नहीं। लेकिन जब कोई कलाकार लगभग लुप्त हो गई किसी कला को पुनर्जीवित कर देता कलाकार समाज और कला जगत के लिए विशिष्ट हो जाता है। ऐसी ही एक कलाकार है सुमन्ती देव भगत, जो भोपाल में रहती हैं। सुमन्ती ने अपनी वेश-भूषा तक को उराँव संस्कृति के
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मरंग गोमके जयपाल सिंह की 118वीं जयंती मनायी गई

मरंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा की 118वीं जयंती रविवार 03 जनवरी 2021 को मनायी गयी। जयपाल का जन्म 3 जनवरी, 1903 को खूंटी जिला के टकराहातू गांव में हुआ था 1970 में 20 मार्च को हुई थी। मरंग गोमके ने अपने जीवनकाल में 1939 से लेकर 1970 तक 19 उच्चतम पदों पर अपनी सेवाएं दीं।
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डॉ निर्मल मिंज का संदेश : KurukhTimes.com के लोकार्पण के अवसर पर

जाने माने शिक्षाविद् व आदिवासी चिंतक डॉ निर्मल मिंज ने KurukhTimes.com के लोकार्पण के अवसर पर अपना शुभकामना संदेश रिकार्ड करवाया है। आप भी सुनें..
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- झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?राँची के कोर्नेलियस मिंज को लोग करन कहते हैं. उनका परिवार सरना आदिवासी था लेकिन बाद में ईसाई बन गया. हालाँकि कोर्नेलियस के घर में अब भी कई लोग सरना हैं. यह परिवार साथ में सरहुल भी मनाता है और क्रिसमस भी. आपस में शादियाँ भी होती हैं. करन कहते हैं कि जब सरना और… Read more: झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?
- झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्मानितरांची: आज दिनांक 21.02.2026 दिन शनिवार को प्रेस क्लब रांची में अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर अखिल झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार सम्मान 2026 झारखंड के 9 साहित्यकारों के रचनाकारों के साथ ओल चिकि लिपि के रचयिता श्रद्धेय पं रघुनाथ मुर्मू तथा वरांग चिति के रचयिता श्रद्धेय कोल लाको बोदरा को मरणोपरांत उनके वंशजों को… Read more: झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्मानित
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- हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते यह जानकर बहुत प्रेरणा मिलती है कि गुमला, रांची, लातेहार और लोहरदगा के युवा गणित (Maths) जैसे कठिन विषय को भी कुँड़ुख में ढाल रहे हैं। प्रसिद्ध अफ्रीकी लेखक चिंतक न्गुगी वा थ्योंगो ने हमेशा यही कहा कि – “भाषा केवल साहित्य के लिए नहीं, बल्कि विज्ञान और तर्क के लिए भी होनी चाहिए” ।… Read more: हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते