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वीर बुधु भगत कॉलोनी का नामकरण कार्यक्रम संपन्न

आज दिनांक -23/7/2023दिन रविवार को आदर्श ग्राम चिरौंदी, रांची में चिरौंदी बाज़ार से पश्चिम क्षेत्र का नामकरण “वीर बुधु भगत कॉलोनी ” ग्राम अध्यक्ष सुखदेव मुंडा की अध्यक्षता एवं ग्रामीणों की उपस्थिति में किया गया । इस कार्यक्रम में सर्वप्रथम, अमर शहीद वीर बुधु भगत की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। उसके बाद गाजा-बाजा के
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बिहार के रोहतास जिले में पहला तोलोंग सिकि प्रशिक्षण केंद्र शुरू हुआ

रोहतास (बिहार), 20 जुलाई – आज दिनांक 20 जुलाई 2023, दिन गुरूवार को रोहतास प्रखंड अंतर्गत रोहतासगढ़ पंचायत के ग्राम माधा में कुंड़ुख़ भाषा की तोलोंग सिकी (लिपि) प्रशिक्षण केंद्र का शुरुआत किया गया। इस कुंड़ुख़ भाषा-लिपि प्रशिक्षण केंद्र में आज शुरुआत करने के बाद प्रत्येक दिन आदिवासी बच्चे बच्चियों को पढ़ने का अवसर मिलेगा।
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बिहार सहित कई और इलाकों में खुलेगा तोलोंग सिकि प्रशिक्षण केंद्र

जमशेदपुर, 15 जुलाई: दिनांक 11 जुलाई 2023 से 15 जुलाई 20213 तक टाटा स्टील फाउंडेशन, जमशेदपुर एवं अद्दी कुंड़ुख़ चाला धुमकुड़िया पड़हा अखड़ा, रांची के संयुक्त तत्वावधान में कुंड़ुख़ भाषा एवं तोलोंग सिकि शिक्षण कार्यशाला जमशेदपुर के ट्राईबल कल्चर सेन्टर, सोनारी में सम्पन्न हुआ। इस कार्यशाला में झारखण्ड के गुमला,लोहरदगा,रांची,सरायकेला-खरसवां,पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम जिला से
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जमशेदपुर में तोलोंग सिकि प्रशिक्षण शिविर का अनुभव साझा किया रोहतास (बिहार) के आदिवासियों ने..

यह मार्मिक आलेख एक प्रशिक्षु का है जिन्होंने पिछले दिनों जमशेदुपर में आयोजित तोलोंग सिकि प्रशिक्षण शिविर में अपनी मंडली के साथ हिस्सा लेकर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। जरूर पढि़ये और अपनी प्रतिक्रिया दीजिये.. मोबाईल तथा इंटरनेट के माध्यम से ज्ञात हुआ कि उरांव जाति की भाषा कुंड़ुख़ की लिपि तोलोंग सिकि
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समाज के उत्थान के लिये धुमकुड़िया पर वृहत शोध की आवश्यक्ता है : एक परिचर्चा

रांची: शुक्रवार, 07 जुलाई को रामकृष्ण मिशन विवेकानन्द एजुकेशनल एंड रिसर्च इंस्टिच्युट के सभागार में ‘Significance of Dhumkuria’ विषय पर पैनल चर्चा हुई। यह परिचर्चा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कलाकेंद्र रांची द्वारा आयोजित की गई थी। इस आयोजन में मुख्य अतिथि रामकृष्ण मिशन आश्रम रांची के माननीय सचिव स्वामी भवेशानन्द जी थे तथा विशिष्ट अतिथि के रूप
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बिसुसेंदरा 2023 सम्पन्न हुआ

यह फोटो, परम्परागत पड़हा ग्रामसभा बिसुसेंदरा सिसई-भरनो का 22 गांव के लोगों द्वारा, दिनांक 20-21 मई 2023 को सम्पन्न बैठक का है। यह बिसुसेंदरा बैठक वर्ष 2011से होता आ रहा है। बिगत कई वर्षों से लगातार कार्य करने के बाद समाज के लोगों द्वारा इस तरह का मार्गदर्शिका नियमावली का निर्धारण किया गया है। यह
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उरांव आदिवासी में प्रचलित रूढ़िगत विवाह के प्रकार पर परिचर्चा / श्रृंखला की कड़ी 3

दिनांक – 4 जून , 2023 को , 10:30 – 12:30 बजे तक, आदिवासी कॉलेज छात्रावास पुस्तकालय, करमटोली, रांची (झारखंड) में, आदिवासी शोध एवं सामाजिक सशक्तीकरण अभियान की श्रृंखला 3/2023 में “उरांव आदिवासी में प्रचलित रूढ़िगत विवाह के प्रकार” विषय पर चर्चा हुई . चर्चा की शुरुवात के पहले उपस्थित लोगो द्वारा दिवंगत डॉ.करमा उरांव
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कुंड़ु़ुख भाषा केंद्रों पर टाटा स्टील फाउन्डेशन द्वारा मानदेय का वितरण व कार्यसमीक्षा संपन्न

दिनांक 17 मई 2023 दिन बुधवार को टाटा स्टील फाउंडेशन, जमशेदपुर एवं अद्दी कुंड़ुख़ चाला धुमकुड़िया पड़हा अखड़ा, रांची के संयुक्त तत्वावधान में संचालित कुंड़ुख़ भाषा एवं तोलोंग सिकि शिक्षा केन्द्र का टाटा स्टील फाउंडेशन जमशेदपुर के अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किया गया। यह बैठक बेड़ो प्रखंड के मनख़ा मुण्डा स्थान पर कईली दइई कुंड़ुख़ लूरकुड़िया,
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आदिवासी शोध एवं सामाजिक सशक्तिकरण अभियान के तहत व्याख्यान एवं परिचर्चा श्रृंखला

उराँव समाज में पारंपरिक विवाह (बेंज्जा) एवं विवाह विच्छेद (बेंज्जा बिहोड़) और न्यायालय व्यवस्था में वर्तमान चुनौतियाँ” विषयक श्रृंखला परिचर्चा का द्वितीय बैठक आदिवासी कॉलेज छात्रावास के पुस्तकालय कक्ष में आयोजन किया गया। जिसमें निम्न गणमान्य लोगों की अहम उपस्थिति रही :- डॉ नारायण भगत (अध्यक्ष, कुँड़ुख साहित्य अकादमी, राँची), श्रीमती महामनी कुमारी उराँव, (सहायक प्राध्यापक,
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आदिवासी शोध व सामाजिक सशक्तिकरण अभि यान

आदिवासी शोध एवं सामाजिक सशक्तिकरण अभियान के तहत “उराँव समाज में पारंपरिक विवाह (बेंज्जा) एवं विवाह विच्छेद (बेंज्जा बिहोड़) और न्यायालय व्यवस्था में वर्तमान चुनौतियाँ” विषयक परिचर्चा का आयोजन किया गया। व्याख्यान एवं परिचर्चा श्रृंखला : 01/2023 दिनांक 02.04.2023 है़। इस व्याख्यान एवं परिचर्चा श्रृंखला के प्रेक्षक पड़हा न्याय पंच के रूप में उपस्थित थे।
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- ओर- करम करम करले बहीन..आईज तारीख 08 मार्च 2026 दिन एतवार के कुड़ुख़ टाइम्स डॉट कॉम कर पुनह परकाशन कर बेरा में टी आर एल ब्लॉग ले उरांव अखरा से तीन गो गावल गीत के नागपुरी भखा में बताल हय। इके धेयान देवब और गुनगुनाब अपने मन सउब – 1 ओर छोट-मोटे तेतईर गे आयो,भिंजल छांहईर गे आयो ।2।घुराल… Read more: ओर- करम करम करले बहीन..
- झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?राँची के कोर्नेलियस मिंज को लोग करन कहते हैं. उनका परिवार सरना आदिवासी था लेकिन बाद में ईसाई बन गया. हालाँकि कोर्नेलियस के घर में अब भी कई लोग सरना हैं. यह परिवार साथ में सरहुल भी मनाता है और क्रिसमस भी. आपस में शादियाँ भी होती हैं. करन कहते हैं कि जब सरना और… Read more: झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?
- झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्मानितरांची: आज दिनांक 21.02.2026 दिन शनिवार को प्रेस क्लब रांची में अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर अखिल झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार सम्मान 2026 झारखंड के 9 साहित्यकारों के रचनाकारों के साथ ओल चिकि लिपि के रचयिता श्रद्धेय पं रघुनाथ मुर्मू तथा वरांग चिति के रचयिता श्रद्धेय कोल लाको बोदरा को मरणोपरांत उनके वंशजों को… Read more: झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार वितरण 2026 – तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्मानित
- औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?आजादी के पचहत्तर साल बाद भी भारत अंग्रेज और अंग्रेजियत (औपनिवेशिक गुलामी) से मुक्त नहीं हुआ है”—इस उक्ति को यदि गहराई से समझें, तो यह किसी भौतिक गुलामी की नहीं बल्कि मानसिक, सांस्कृतिक, प्रशासनिक और वैचारिक गुलामी की ओर संकेत करती है। भारत ने 1947 में राजनीतिक स्वतंत्रता तो प्राप्त की, परंतु औपनिवेशिक सत्ता द्वारा… Read more: औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?
- हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते यह जानकर बहुत प्रेरणा मिलती है कि गुमला, रांची, लातेहार और लोहरदगा के युवा गणित (Maths) जैसे कठिन विषय को भी कुँड़ुख में ढाल रहे हैं। प्रसिद्ध अफ्रीकी लेखक चिंतक न्गुगी वा थ्योंगो ने हमेशा यही कहा कि – “भाषा केवल साहित्य के लिए नहीं, बल्कि विज्ञान और तर्क के लिए भी होनी चाहिए” ।… Read more: हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते