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कुँड़ुख़ तोलोङ सिकि का दुमका (संताल परगना) का प्रसिद्ध हिजला मेला में प्रदर्शनी

ज्ञातव्य है कि ब्रिटिश भारत में सन् 1885 में संताल परगना, जिला घोषित हुआ‚ जिसका मुख्यालय दुमका बना। कहा जाता है इसी संताल परगना जिला में पदस्थासपित एक अंगरेज आफिसर द्वारा दुमका में वर्ष के अंत में धान कटनी के बाद एक मेला का आयोजन कराया जाता था। जो देश की आजादी के बाद एक
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डॉ मुण्डा एवं डॉ इन्दु धान की उपस्थिति में तोलोङ सिकि (लिपि) का लोकार्पण

डॉ॰ रामदयाल मुण्डा‚ पूर्व कुलपति‚ राँची विष्वविद्यालय‚ राँची एवं डॉ॰ (श्रीमती) इन्दु धान‚ पूर्व कुलपति‚ मगध विश्व्विद्यालय् बोधगया एवं सिद्हु-कान्हु मुरमु विश्वमविद्यालय‚ दुमका द्वारा संयुक्त रूप से एक संवादाता सम्मेलन में दिनांक 15 मई 1999 को तोलोंग सिकि (लिपि) को जनमानस के व्यवहार के लिए लोकार्पित किया गया। यह संवादाता सम्मेलन – तोलोंग सिकि प्रचारिणी
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22 गांव सभा पड़हा बिसु सेन्दरा समन्वय सम्मेलन 17 एवं 18 अप्रैल 2021
यह विडियो 22 गांव सभा] पड़हा] बिसु सेन्दरा समन्वय सम्मेलन 17 एवं 18 अप्रील 2021 का है। यह आयोजन गांव करकरी थाना सिसई जिला गुमला में हुआ था। यह विडियो 22 गांव सभा पड़हा बिसु सेन्दसरा के सम्मालनित पंच्चोंि के स्वायगत में किया गया नृत्यन एवं गीत है – रिपोर्टर : गजेन्द्र
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22 गांव सभा, पड़हा, बिसु सेन्दरा समन्वय सम्मेलन

पता : ग्राम -करकरी, पो0 – करकरी, थाना – सिसई, जिला – गुमला – झारखण्ड, पिन – 835324 : भारतीय संविधान की 5वीं अनुसूची के अन्तर्गत झारखण्ड राज्य के अधिसूचित क्षेत्र में ग्राम – करकरी, पो0 – करकरी, थाना – सिसई, जिला – गुमला, झारखण्ड में संसद द्वारा पारित पेसा कानून 1996 (PESA – 1996) के
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सरहुल का संदेश.. आदिवासी छात्रावास रांची में मनाया गया सरहुल 2021

कोरोना लहर 2 से पूरा देश और सूबा परेशान है. कोरोना लहर 2 के चलते लोगों को सांस लेने में दिक्कतें हो रही हैं. अस्पताल में जगह नहीं मिल रहा है. सरकारी अस्पतालों में जगह नहीं है. प्राईवेट अस्पताल में फीस भरने के लिए पैसे नहीं हैं. ऐसे में गरीब करे तो क्या करे। पर
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आदिवासी कॉलेज छात्रावास में सरहुल संपन्न

कोरोना 2 के बीच आदिवासी समाज अपनी पुस्तैनी धरोहर को आगे बढ़ाते हुए चैत शुक्ल तृतिया (15 अप्रील 2021) को परम्परागत तरीके से सरहुल परब मनाया. इस वर्ष कोरोना महामारी के चलते झारखण्ड सरकार की ओर से जुलूस निकालने पर पाबंदी के चलते लोग अपने पूजा स्थल पर सामाजिक दूरी बनाते हुए पूजा अर्चना किये. बैगा, पहान, पुजार, महतो,
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Tribal Society Demanded inclusion of Kurukh & TolongSiki at Kurukh Sahitaya Sabha in Assam

Kokrajhar (Assam): The local tribal society organized here the 6th biennial conference of All kurukh (oraon) Sahitya Sabha (Assam) on 19, 20 and 21 March 2021 at Mazbat, Udalguri district (Assam). Sri Promod Boro the Chief of BTC was the Chief Guest and Ashok Baxla, founder secretary, Kurukh Litrary Society of India (New Delhi) was
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स्कूली बच्चों ने मनाया तोलोंग सिकि कुंड़ुख़ भाषा सप्ताह दिवस 2

स्कूली बच्चों ने मनाया तोलोंग सिकि कुंड़ुख़ भाषा सप्ताह दिवस
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स्कूली बच्चों ने मनाया तोलोंग सिकि कुंड़ुख़ भाषा सप्ताह दिवस

यह विडियो बीर बुधु भगत कुड़ुख़ स्कूल, छोटका सैन्दा, गुमला के बच्चों के कार्यक्रम का है। यह अवसर तोलोंग सिकि कुंड़ुख़ भाषा सप्ताह दिवस का पहला दिन १२-२-२०२१ है। यह आयोजन कार्तिक उरांव बाल विकास विद्यालय, सिसई, गुमला के प्रांगण में हुआ। इस स्कूल के बच्चे कुड़ुख़ भाषा की पढ़ाई, तोलोंग सिकि लिपि में करते
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कुँड़ुख़़-हिन्दी शब्दकोष और कुँड़ुख़ संस्कारों पर तीन पुस्तकों का लोकार्पण संपन्न

झारखण्ड की राजधानी राँची में स्थित डा रामदयाल मुण्डा जनजातीय शोध संस्थान, मोरहाबादी के सभागार में कुँड़ुख़ भाषा एवं सामाजिक पहलूओं से जुड़ी तीन पुस्तकों का विमोचन किया गया। पहली पुस्तक स्व विजय उराँव द्वारा लिखित – कुँड़ुख़-हिन्दी शब्दकोष है। दूसरी पुस्तक श्री बहुरा उराँव द्वारा रचित – कुँड़ुख़ (उराँव) समाज में जन्म विवाह एवं
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- ओर- करम करम करले बहीन..आईज तारीख 08 मार्च 2026 दिन एतवार के कुड़ुख़ टाइम्स डॉट कॉम कर पुनह परकाशन कर बेरा में टी आर एल ब्लॉग ले उरांव अखरा से तीन गो गावल गीत के नागपुरी भखा में बताल हय। इके धेयान देवब और गुनगुनाब अपने मन सउब – 1 ओर छोट-मोटे तेतईर गे आयो,भिंजल छांहईर गे आयो ।2।घुराल… Read more: ओर- करम करम करले बहीन..
- झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?राँची के कोर्नेलियस मिंज को लोग करन कहते हैं. उनका परिवार सरना आदिवासी था लेकिन बाद में ईसाई बन गया. हालाँकि कोर्नेलियस के घर में अब भी कई लोग सरना हैं. यह परिवार साथ में सरहुल भी मनाता है और क्रिसमस भी. आपस में शादियाँ भी होती हैं. करन कहते हैं कि जब सरना और… Read more: झारखंड: क्या आदिवासियों को लालच में फँसाकर ईसाई बनाया जा रहा है?
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- औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?आजादी के पचहत्तर साल बाद भी भारत अंग्रेज और अंग्रेजियत (औपनिवेशिक गुलामी) से मुक्त नहीं हुआ है”—इस उक्ति को यदि गहराई से समझें, तो यह किसी भौतिक गुलामी की नहीं बल्कि मानसिक, सांस्कृतिक, प्रशासनिक और वैचारिक गुलामी की ओर संकेत करती है। भारत ने 1947 में राजनीतिक स्वतंत्रता तो प्राप्त की, परंतु औपनिवेशिक सत्ता द्वारा… Read more: औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?
- हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते यह जानकर बहुत प्रेरणा मिलती है कि गुमला, रांची, लातेहार और लोहरदगा के युवा गणित (Maths) जैसे कठिन विषय को भी कुँड़ुख में ढाल रहे हैं। प्रसिद्ध अफ्रीकी लेखक चिंतक न्गुगी वा थ्योंगो ने हमेशा यही कहा कि – “भाषा केवल साहित्य के लिए नहीं, बल्कि विज्ञान और तर्क के लिए भी होनी चाहिए” ।… Read more: हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ और समाधान के कुछ रास्ते