कुँडुख़ (उराँव) भाषा शिक्षक पद सृजन-सर्वे में भारी गड़बड़ी, सुधार नहीं हुआ तो कुँडुख़ समाज आंदोलन करने के लिए हो जाएगा बाध्य
आदिवासियों की विलुप्त होती कुँडुख़, मुण्डा, हो, खड़िया आदि भाषा को बचाने के लिए सरकार ने प्राथमिक/ मध्य विद्यालय स्तर पर भाषा शिक्षक बहाली कराने का निर्णय लिया है। यह निर्णय सराहनीय है। लेकिन वहीं पांचवी अनुसूचित क्षेत्र के गुमला जिला के भरनो प्रखंड को छोड़कर, गुमला जिला के शेष सभी प्रखंडो में कुँडुख़ ( उराँव ) भाषा-पद सृजन में भारी गड़बड़ी किया गया है जिसने कुँडुख़ समाज की नींद उड़ा दी है। झारखंड सरकार की उचित नीति न होने के कारण प्राथमिक/ मध्य विद्यालय के प्रधानाचार्य के द्वारा कुँडुख़/उराँव बच्चों का नामांकित संख्या विद्यालय में अधिक होने के बावजूद कुँडुख़ के स्थान पर नागपुरी का पद सृजि