संस्कृति को बचाने के लिए ज़रूरी है भाषा को बचाना - जसिंता केरकेट्टा
किसी भी समाज की संस्कृति के बचे रहने के लिए उसकी अपनी भाषा का बचा होना ज़रूरी है। भाषा के बिना कैसे अपनी संस्कृति को बचाने की बात हो सकती है? भाषा अपनी संस्कृति को अभिव्यक्त करने का माध्यम तो होती ही है, वह एक शक्तिशाली सांस्कृतिक हथियार भी होती है।
किसी समाज को ख़त्म करना हो तो उससे, उसकी भाषा छीन लीजिए। वह अपने आप खत्म हो जाएगा। यह बात हमेशा वर्चस्ववादी समाज द्वारा कही जाती रही है। इसी तरीके से आदिवासियों को ख़त्म करने के लिए निरंतर प्रयास होते रहे हैं और आज भी हो रहे हैं।