झारखंडी शिक्षाविद् डॉ निर्मल मिंज जिन्होंने आदिवासी भाषाओं को पढ़ने पढ़ाने का मौका दिया
यह सत्तर के बाद का समय था, जब डॉ. निर्मल मिंजअक्सर संत जेवियर कॉलेज आते-जाते दिखाई पड़ते थे. उनके बारे जानकारी मिलती थी-अनुशासनप्रियके साथ-साथ झारखंड के भाषा संस्कृति के विकास के लिए उत्सुक हैं.यही कारण था कि झारखंड में नौ झारखंडी भाषाओं की पढ़ाई अपने कॉलेज में शुरू करने का साहस एवं दूरदरर्शी निर्णय उन्होंने लिया. बाद में ‘वीर भारत तलवार’ के साथ झारखंडी संस्कृति, भाषा, इतिहास आदि के विकास के लिए उन्होंने अग्रणी भूमिका निभायी और ‘झारखंडी बुद्धिजीवी परिषद’ का गठन किया जिसके वे अध्यक्ष थे.