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आलेख / Articles

कुंड़ुख भाषा - तोलोंग सिकि लिपि पर राष्‍ट्रीय सेमिनार का दूसरा दिन

दिनांक 02 एवं 03 अक्टुवर 2024 को कुड़ुख़ भाषा की दशा एवं दिशा विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार, कुड़ुख़ भाषा एवं सांस्कृतिक पुनरूत्थान केन्द, बम्हनी  गुमला में सम्पन्न हुआ। इस सेमिनार में दिनांक 03 अक्टुवर 2024  किये गये  प्रस्तुति में से कुड़ख़ भाषा तोलोंग सिकि और उरांव समाज की भूमिका विषय किए गए प्रस्तुति का पीडीएफ आप सभी के समक्ष प्रस्तुत है -

राष्‍ट्रीय सेमिनार

भाषाई विरासत का अनावरण: मराठी, गुजराती, मारवाड़ी और सिंधी पर द्रविड़ प्रभाव

हड़प्पा सभ्यता के पतन के बाद, आक्रमणकारी आर्यों ने 16 आर्य राज्यों की स्थापना की, जैसा कि दूसरी छवि में दर्शाया गया है। किंवदंती है कि राम के सौतेले भाई भरत ने तक्षशिला शहर की स्थापना करके गांधार साम्राज्य तक अपना प्रभाव बढ़ाया। यह क्षेत्र, गांधार, भरत की माता कैकेयी के पैतृक क्षेत्र केकेय साम्राज्य के निकट था। इस बीच, राम के भाई लक्ष्मण को गंगा के किनारे लक्ष्मणपुरा की स्थापना का श्रेय दिया जाता है, जिसे अब लखनऊ के नाम से जाना जाता है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने कथित तौर पर वंगा साम्राज्य (बंगाल) को उपनिवेश बनाया, और वहां चंद्रकांता शहर की स्थापना की। कहा जाता है कि राम के सबसे छोटे भाई शत्रु

आज के समय में इंसान इंटरनेट में कैद है और प्राकृति से दूर है

लेकिन अगर आपको समय मिले तो phytoncides प्रोसेस के बारे में गूगल करिएगा। आपको पता चलेगा कि जंगलों की ओर जाने से और वहां सांस लेने से आप अपना इम्यून सिस्टम बेहतर कर सकते हैं।

पूरा जंगल एक दूसरे की मदद करता रहता है। इस पूरे कांसेप्ट को Ubuntu कहते हैं। हम खुद को समझदार मानते हैं। लेकिन हमें ये कांसेप्ट बहुत कुछ सिखा सकता है। इसलिए दूसरों की मदद करते रहें और आगे बढ़ते रहें।

धुमकुडि़या : आदिवासी समाज की आरंभिक सामाजिक पाठशाला (भाग 3/3)

इस विशेष अंक का भाग-3 नीचे ऑनलाइन पढ़ें नि: शुल्‍क.. 
आप इसे डाउनलोड कर सकते हैं.. 

धुमकुडि़या भाग-2 https://kurukhtimes.com/node/380 
धुमकुडि़या भाग-1 https://kurukhtimes.com/node/379

धुमकुडि़या : आदिवासी समाज की आरंभिक सामाजिक पाठशाला (भाग 2/3)

इस विशेष अंक का भाग -2 नीचे ऑनलाइन पढ़ें नि: शुल्‍क.. 
आप इसे डाउनलोड कर सकते हैं.. 

धुमकुडि़या भाग-3 https://kurukhtimes.com/node/381

धुमकुडि़या भाग-1 https://kurukhtimes.com/node/379

धुमकुडि़या : आदिवासी समाज की आरंभिक सामाजिक पाठशाला (भाग1/3)

इस विशेष अंक का भाग एक नीचे ऑनलाइन पढ़ें नि: शुल्‍क.. 
आप इसे डाउनलोड कर सकते हैं.. 

 

धुमकुडि़या भाग-2 https://kurukhtimes.com/node/380
धुमकुडि़या भाग-3 https://kurukhtimes.com/node/381

परम्‍परागत ग्रामसभा पड़हा बेलपंच्‍चा सामाजिक न्‍याय पंच - Digital

परम्‍परागत ग्रामसभा पड़हा बेलपंच्‍चा सामाजिक न्‍याय पंच पर विशेष कवरेज। इस विशेष अंक को यहां नीचे पीडीएफ में पढ़ सकते हैं। आप चाहें तो इसे यहीं से डाउनलोड भी कर सकते हैं।   

इंटरमीडियट काउंसिल, रांची विवि एवं कुंड़ुंंख समाज का अन्‍तर्द्वन्‍द्व : नीतू साक्षी टोप्‍पो

शोधार्थी नीतू साक्षी टोप्‍पो का पठनीय आलेख जिसमें कुंड़ुंख भाषा एवं लिपि को लेकर झारखंड अधिविद्य परिषद, रांची विश्‍वविद्यालय के कुंड़ुंख भाषा विभाग और कुड़ुंख भाषा-भाषी उरांव समाज के अंतर्द्वन्‍द्व को विस्‍तार से बताया गया है। पूरा आलख पढ़ें नीचे पीडीएफ में.. 

जमशेदपुर में तोलोंग सिकि प्रशिक्षण शिविर का अनुभव साझा किया रोहतास (बिहार) के आदिवासियों ने.. 

यह  मार्मिक आलेख एक प्रशिक्षु का है जिन्‍होंने पिछले दिनों जमशेदुपर में आयोजित तोलोंग सिकि प्रशिक्षण शिविर में अपनी मंडली के साथ हिस्‍सा लेकर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। जरूर पढि़ये और अपनी प्रतिक्रिया दीजिये.. 

कुँडुख़ भाषा एवं तोलोंग सिकि, लिपि के प्रचार-प्रसार की उलझने और चुनौतियाँ

विदित है कि कुँडुख़़ भाषा की लिपि, तोलोंग सिकि के विकास में देश का आदिवासी आन्दोलन तथा झारखण्ड अलग प्रांत आन्दोलन का छात्र आन्दोलन की भूमिका उल्लेखनीय रही है। इसके वाबजूद कुँडुख़ तोलोंग सिकि के प्रचार-प्रसार में काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ा। वैसे पेशे से चिकित्सक डा० नारायण उराव के लगन एवं सूझबूझ से कुँडुख़ भाषा की लिपि के रूप में तोलोंग सिकि, लिपि को सामाजिक मान्यता मिल पायी और सामाजिक चिंतकों तथा बुद्धिजीवियों के मार्गदर्शन से झारखण्ड सरकार द्वारा वर्ष 2003 में कुँडुख़ भाषा की लिपि के रूप में स्वीकार कर लिया गया। ये सभी बातें होते हुए कुँडुख़ भाषा एवं लिपि के अग्रेतर विकास के क्रम में